14 अगस्त 1947 की रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पावर का एग्रीमेंट हुआ था…
Badi Khabar
Madhya Pradesh
Katni
14 अगस्त 1947 की रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पावर का एग्रीमेंट हुआ था…   सत्ता के हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement ) यानि भारत के आज़ादी की संधि | ये इतनी खतरनाक संधि है की अगर आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर 1857 तक किये गए सभी 565 संधियों या कहें साजिस को जोड़ देंगे तो उस से भी ज्यादा खतरनाक संधि है ये | 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में | Transfer of Power और Independence ये दो अलग चीजे है | स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजे है | और सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है ? आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है | और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है | यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे | लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, माने अंग्रेजों ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरुरत पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे | ये अंग्रेजो का interpretation (व्याख्या) था | और हिन्दुस्तानी लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया | और इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका असल अर्थ भी यही है | अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है “One of the self-governing nations in the British Commonwealth” और दूसरा “Dominance or power through legal authority “| Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | दुःख तो ये होता है की उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे या आप कह सकते हैं क़ि पुरे होशो हवास में इस संधि को मान लिया या कहें जानबूझ कर ये सब स्वीकार कर लिया | और ये जो तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून | और ऐसे धोखाधड़ी से अगर इस देश की आजादी आई हो तो वो आजादी, आजादी है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे | वो नोआखाली में थे | और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थे कि बापू चलिए आप | गाँधी जी ने मना कर दिया था | क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है | और गाँधी जी ने स्पस्ट कह दिया था कि ये आजादी नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है | और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी | उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये सन्देश देना चाहता हु कि ये जो तथाकथित आजादी (So Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ? इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था) और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई …. ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में | अब शर्तों की बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | वो एक शब्द आप सब सुनते हैं न Commonwealth Nations | अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में Commonwealth Game हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है | ये Commonwealth का मतलब होता है समान सम्पति | किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति | आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो | Commonwealth में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने ही देश में जा रही है लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं | मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त 1947 को हमारी आज़ादी की बात कही जाती है वो झूठ है | और Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है वो एक Dominion State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में| इस देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं | लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है | ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं | एक शब्द आप सुनते होंगे High Commission ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दुसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता | एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ……. हमारे यहाँ के अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं – (ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है | भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है “India that is Bharat ” जब क़ि होना ये चाहिए था “Bharat that was India ” लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है | अब हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में कितनी सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक भारत था तब तक तो दुनिया में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है | भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद में उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया गया | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक है | और वन्देमातरम को ले के मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो अंग्रेजों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है जिसमे एक शख्स को भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या कहें भगवान से भी बढ़कर | इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना था | यही वजह रही क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक किसी को मालूम नहीं है | समय समय पर कई अफवाहें फैली लेकिन सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और न ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई | मतलब भारत का एक महान स्वतंत्रता सेनानी अपने ही देश के लिए बेगाना हो गया | सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को मालूम होगा ही लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है क़ि ये 1942 में बनाया गया था और उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से मदद ली थी जो कि अंग्रेजो के दुश्मन थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था | और जर्मनी के हिटलर और इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों की वजह से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दुसरे के कट्टर दुश्मन थे | एक दुश्मन देश की मदद से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे | एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी तरफ उन्हें भारत में भी सुभाष चन्द्र बोस की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था | इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के दुश्मन थे | इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया जाता था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) | आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर एक किताब की दुकान देखते होंगे “व्हीलर बुक स्टोर” वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन था ? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां चलवाई थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो गोदी का बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा | इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी शुरू हुई थी और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये ख़त्म होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला गया क्योंकि ये इस संधि में है | इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेगे लेकिन इस देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा | इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC चलता है और Ireland में जहाँ “I” का मतलब Irish है वही भारत के IPC में “I” का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है) Indian Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest Act, Indian Agricultural Price Commission Act सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए | इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है (हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन रोड, कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे | हमारे गुजरात में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला | अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये गुलामी का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है | हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और मजे क़ि बात ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग किस्म क़ि शिक्षा व्यवस्था रखी है | हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक उल्टा है | मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे पास कौन सी डिग्री है ? अगर नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई मतलब नहीं है | जबकि उनके यहाँ ऐसा बिलकुल नहीं है आप अगर कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है लेकिन कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा | नोबेल पुरस्कार पाने के लिए आपको डिग्री की जरूरत नहीं होती है | हमारे शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है | ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था क़ि देन है, मतलब ये है क़ि आप भले ही 70 नंबर में फेल है लेकिन 30 नंबर लाये है तो पास हैं, ऐसा शिक्षा तंत्र से सिर्फ गदहे ही पैदा हो सकते हैं और यही अंग्रेज चाहते थे | आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका नाम है Anthropology | जानते है इसमें क्या पढाया जाता है ? इसमें गुलाम लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता है | और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में शुरू किया था और आज आज़ादी के 64 साल बाद भी ये इस देश के विश्ववविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की परीक्षा में भी ये चलता है | इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग नहीं दिया जायेगा मतलब हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में ख़त्म हो जाये ये साजिस की गयी | आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट करने का भरसक प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर नहीं पाए | दुनिया में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप बीमार हों तो आपका इलाज होगा लेकिन आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप बीमार ही मत पड़िए | आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ -जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में बीमार पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर का खून गन्दा हो गया है जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और खून निकल जाने की वजह से जोर्ज वाशिंगटन मर गया | ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख के गया था | मतलब कहने का ये है क़ि हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय | और ये सब आयुर्वेद की वजह से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारे सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है | इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा | हमारे देश के समृद्धि और यहाँ मौजूद उच्च तकनीक की वजह ये गुरुकुल ही थे | और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, उसने कहा था “”I have traveled across the length and breadth of India and have not seen one person who is a beggar, who is a thief, such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such caliber, that I do not think we would ever conquer this country, unless we break the very backbone of this nation, which is her spiritual and cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and English is good and greater than their own, they will lose their self esteem, their native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation” | गुरुकुल का मतलब हम लोग केवल वेद, पुराण,उपनिषद ही समझते हैं जो की हमारी मुर्खता है अगर आज की भाषा में कहूं तो ये गुरुकुल जो होते थे वो सब के सब Higher Learning Institute हुआ करते थे | इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून न हो इस देश में या उसके फैसले को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा | भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी गयी लेकिन इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से लेकिन बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह गयी और लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है | अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि उनको पढना क्या है और UNO में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं | आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल बाद तक संसद में वार्षिक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है क्यों ? क्योंकि जब हमारे देश में शाम के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके और उस बजट की समीक्षा कर सके | इतनी गुलामी में रहा है ये देश | ये भी इसी संधि का हिस्सा है | 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन कार्ड का सिस्टम शुरू किया क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को अनाज क़ि जरूरत थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे | इसीलिए उन्होंने यहाँ जनवितरण प्रणाली और राशन कार्ड क़ि शुरुआत क़ि | वो प्रणाली आज भी लागू है इस देश में क्योंकि वो इस संधि में है | और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल उसी समय शुरू किया गया और वो आज भी जारी है | जिनके पास राशन कार्ड होता था उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था | आज भी देखिये राशन कार्ड ही मुख्य पहचान पत्र है इस देश में | अंग्रेजों के आने के पहले इस देश में गायों को काटने का कोई कत्लखाना नहीं था | मुगलों के समय तो ये कानून था क़ि कोई अगर गाय को काट दे तो उसका हाथ काट दिया जाता था | अंग्रेज यहाँ आये तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में गाय काटने का कत्लखाना शुरू किया, पहला शराबखाना शुरू किया, पहला वेश्यालय शुरू किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ करती थी वहां वहां वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां शराबखाना खुला, वहां वहां गाय के काटने के लिए कत्लखाना खुला | ऐसे पुरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों के | अब ये सब क्यों बनाये गए थे ये आप सब आसानी से समझ सकते हैं | अंग्रेजों के जाने के बाद ये सब ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि में है | हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो दरअसल अंग्रेजों का वेस्टमिन्स्टर सिस्टम है | ये अंग्रेजो के इंग्लैंड क़ि संसदीय प्रणाली है | ये कहीं से भी न संसदीय है और न ही लोकतान्त्रिक है| लेकिन इस देश में वही सिस्टम है क्योंकि वो इस संधि में कहा गया है | और इसी वेस्टमिन्स्टर सिस्टम को महात्मा गाँधी बाँझ और वेश्या कहते थे (मतलब आप समझ गए होंगे) | ऐसी हजारों शर्तें हैं | मैंने अभी जितना जरूरी समझा उतना लिखा है | मतलब यही है क़ि इस देश में जो कुछ भी अभी चल रहा है वो सब अंग्रेजों का है हमारा कुछ नहीं है | अब आप के मन में ये सवाल हो रहा होगा क़ि पहले के राजाओं को तो अंग्रेजी नहीं आती थी तो वो खतरनाक संधियों (साजिस) के जाल में फँस कर अपना राज्य गवां बैठे लेकिन आज़ादी के समय वाले नेताओं को तो अच्छी अंग्रेजी आती थी फिर वो कैसे इन संधियों के जाल में फँस गए | इसका कारण थोडा भिन्न है क्योंकि आज़ादी के समय वाले नेता अंग्रेजों को अपना आदर्श मानते थे इसलिए उन्होंने जानबूझ कर ये संधि क़ि थी | वो मानते थे क़ि अंग्रेजों से बढियां कोई नहीं है इस दुनिया में | भारत की आज़ादी के समय के नेताओं के भाषण आप पढेंगे तो आप पाएंगे क़ि वो केवल देखने में ही भारतीय थे लेकिन मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे | वे कहते थे क़ि सारा आदर्श है तो अंग्रेजों में, आदर्श शिक्षा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श अर्थव्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श चिकित्सा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कृषि व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श न्याय व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कानून व्यवस्था है तो अंग्रेजों की | हमारे आज़ादी के समय के नेताओं को अंग्रेजों से बड़ा आदर्श कोई दिखता नहीं था और वे ताल ठोक ठोक कर कहते थे क़ि हमें भारत अंग्रेजों जैसा बनाना है | अंग्रेज हमें जिस रस्ते पर चलाएंगे उसी रास्ते पर हम चलेंगे | इसीलिए वे ऐसी मूर्खतापूर्ण संधियों में फंसे | अगर आप अभी तक उन्हें देशभक्त मान रहे थे तो ये भ्रम दिल से निकाल दीजिये | और आप अगर समझ रहे हैं क़ि वो ABC पार्टी के नेता ख़राब थे या हैं तो XYZ पार्टी के नेता भी दूध के धुले नहीं हैं | आप किसी को भी अच्छा मत समझिएगा क्योंक़ि आज़ादी के बाद के इन 64 सालों में सब ने चाहे वो राष्ट्रीय पार्टी हो या प्रादेशिक पार्टी, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता का स्वाद तो सबो ने चखा ही है | खैर …………… तो भारत क़ि गुलामी जो अंग्रेजों के ज़माने में थी, अंग्रेजों के जाने के 64 साल बाद आज 2011 में जस क़ि तस है क्योंकि हमने संधि कर रखी है और देश को इन खतरनाक संधियों के मकडजाल में फंसा रखा है | बहुत दुःख होता है अपने देश के बारे जानकार और सोच कर | मैं ये सब कोई ख़ुशी से नहीं लिखता हूँ ये मेरे दिल का दर्द होता है जो मैं आप लोगों से शेयर करता हूँ | ये सब बदलना जरूरी है लेकिन हमें सरकार नहीं व्यवस्था बदलनी होगी और आप अगर सोच रहे हैं क़ि कोई मसीहा आएगा और सब बदल देगा तो आप ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं | कोई हनुमान जी, कोई राम जी, या कोई कृष्ण जी नहीं आने वाले | आपको और हमको ही ये सारे अवतार में आना होगा, हमें ही सड़कों पर उतरना होगा और और इस व्यवस्था को जड मूल से समाप्त करना होगा | भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करता है | इतने लम्बे पत्रलेख को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद् | और अच्छा लगा हो तो इसे फॉरवर्ड कीजिये, और ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये


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कटनी बहोरीबंद तहसील के ग्राम पंचायत चदनखेड़ा के ग्राम साड़ा के प्राथमिक स्कूल में आज नहीं मिलेगा बच्चो को मध्यान भोजन , H.M. नीलेश जैन किया फतवा जारी श्री दुर्गा समूह की अध्यछ ने बताया कि , नीलेश जैन ने बोला है ,की जब तक में न कहु बच्चो का भोजन नहीं बनेगा अध्यछ ने ये भी आरोप लगाया कि आय दिन परेसान करता है उसी के चलते आज दिनांक 16/09/2017 को मध्यान भोजन खबर लिखे जाने तक नहीं बना 12:30 तक खाना नहीं बना, स्कूल H.M. स्कूल से नदारत थे पता चला की वो आज नहीं आये लोगो का यह भी केहना है कि नीलेश जैन हमेशा स्कूल से नदारत रहते है। जब नीलेश जैन से संपर्क करने की कोशिस की तो उनका मोबाईल बंद मिला हद तो तब हो गई की यह स्कूल 5 वीं तक है और 70 बच्चों का दाखिल है ,और एक ही कमरे में स्कूल लग रहा है जबकि स्कूल में तीन कमरे है ,दो कमरों में कई वर्षों से ताला लगा हुआ है पूछे जाने पर टीचर ने भी यही बताया कि कई सालों से ताला लगा है ,और हमें मज़बूरी में बच्चों को बरामदे में बैठा कर पढ़ना पड़ता है वही एक कमरे में सिर्फ तीन क्लास लगानी पडती है । जब हमने बी आर सी बहोरीबंद मिश्रा से जब स्कूल में लगे ताले की जानकारी मांगी तो उन्होंने जो बताया उससे सुनकर आप चौक जायगे उन्होंने बताया कि इस बात की जान करी मुझे है और प्रयास किया जा रहा है, जब हमने पूछा की कब तक ताला खुल जायेगा तो उन्होंने कोई भी संतोष पूर्ण जबाब नहीं दिया। सबाल बहुत है, इतने दिनों से शासकीय भवन का ताला कियू नहीं खुला ,किसने लगाया है ताला, ताला लगाने वाले पर आज तक कार्यवाही कियू नहीं हुई जब ऐसा नहीं की तहसील के अधकारियों को इस के बारे में नहीं मालूम उन्हें मालूम होते हुए भी सब कुंभकर्ण की नीद सो रहे है और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ,बताया ये भी जा रहा है कि जनवरी में कलेक्टर का भी दौरा स्कूल में हुआ था इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई अगर इतने सजग कलेक्टर के रहते स्कूल का ताला नहीं खुला तो ये बड़े हैरानी की बात है अब देखना ये भी बनता है कि बच्चों को न्याय कब मिलता है। कब तक बच्चो को धूप ,वारिश, और ठण्ड से कब तक निजात मिलेगी ।


मौन क्यों हैं - देश के पाँचों शंकराचार्य ?
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सनातन धर्म - हिन्दू धर्म का जितना नुकसान इस देश के तथाकथित बाबाओं ने किया है उतना किसी ने नही किया ! फिर भी देश के सभी शंकराचार्यों का मौन और निष्क्रिय रहना समझ से परे है ! हमारे धर्म की साख को आये दिन कोई न कोई बाबा बट्टा लगाता रहता है ! इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी कि देश का मीड़िया सिर्फ़ अनाप शनाप पैसा कमाने के चक्कर में आम जनता के बीच में ऐसे ढोंगी और व्यभचारी बाबाओं को समाज व देश विदेश में स्थापित करने का काम करता है ! केवल " विज्ञापन " लिख कर चैनल अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं ! हिन्दू धर्म - सनातन धर्म के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी हमारे शंकराचार्यों की है जो स्वर्ण छत्र के नीचे बैठ कर सिर्फ अपनी पूजा करा रहे हैं ! यही मूल कारण है कि हमारे धर्म की ठेकेदारी अनेक संगठनों ने ले ली है और वे केवल अपने खास उद्देश्य की पूर्ति में जुटे हैं ! ज्ञात हो अपने धर्म की रक्षा और संवर्धन के उद्देश्य से ही आदिगुरू शंकराचार्य जी ने भारत में चार मठों की स्थापना की थी वर्तमान में पाँच मठ हैं ! अभी भी समय है - माननीय शंकराचार्य अपने दायित्व के प्रति जागरूक हों अन्यथा देश की आस्तिक जनता का शोषण ऐसे ही होता रहेगा ! और एक दिन ऐसा भी आयेगा जब हमारे धर्म का अस्तित्व बचाना मुश्किल होगा जो कि विदेशी ताकतें चाहती हैं ! * जगदीश विश्वकर्मा संपादक :- न्यूज़ इंडिया टी वी


राम रहीम ने किराये से बुलाये थे गुंडे
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डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई के विशेष अदालत ने साध्वी के बलात्कार के आरोप में दोषी करार दे दिया है। ऐसे में सोमवार को उनके सजा का ऐलान किया जाएगा। हर जगह पुलिस, मिलिट्री, ड्रोन आदि सुरक्षा में लगे हैं। हरियाणा और पंजाब के विद्यालय और कॉलेज बंद करा दिए गए हैं। यही नहीं कई क्षेत्रों में धारा 144 भी लागू है। बाबा की अंधी आस्था ने हरियाणा समेत अगल-बगल राज्यों का माहौल बिगाड़कर रख दिया है। हालात ये है कि जो जज साहब कोर्ट में फैसला सुनाते थे वो अब जेल जाकर फैसला सुनाएंगे या फिर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए। लेकिन इन सब परिस्थितियों के पीछे कौन लोग हैं और किनके वजह से ऐसी नौबत आई इन सब का पता धीरे-धीरे चल रहा है। जी हां, मीडिया खबरों के मुताबिक पंचकूला में फैली हिंसा के पीछे सिर्फ बाबा राम रहीम के समर्थक ही नहीं थे बल्कि डेरा सच्चा सौदा समूह के लोगों ने भाड़े पर गुंडें भी बुलाए थे। हर रोज 1000 रुपये और फ्री में भोजन पर लोगों को पंचकूला में जुटाया गया था। यह सब इसलिए किया गया ताकि कोर्ट और सरकार पर दबाव बनाया जा सके। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक सिरसा के एक व्यापारी ने बताया है कि “जब हमारी नौकरानी गुरुवार को नहीं आई, तो हमने मोबाइल पर उससे संपर्क किया उसने कहा कि वह डेरा के अनुयायियों के साथ पंचकूला जा रही है। ऐसे में हमें विश्वास हुआ कि डेरा ने उन्हें कोई लालच दी है। वहीं हिसार जिले के एक डॉक्टर ने कहा कि इलाकों में घोषणा की गई थी कि जो भी डेरा के समर्थन में प्रदर्शन करने चलेगा, उसे एक हजार रूपए और खाने को खाना मिलेगा। हालांकि डेरा के प्रवक्ता ने इस पर विरोध जताया है और कहा है कि लोग अपनी मर्जी और आस्था से आए थे। बता दें कि अब तक हुई हिंसा में 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है वहीं सैकड़ों घायल है। यही नहीं करोड़ो की सरकारी संपत्ति को भी जला कर राख कर दिया गया है। कईयों की दुकानें और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया है। हालांकि हजारों की तादाद में सुरक्षाबल लगा दी गई है लेकिन लोगों में डर व्यापत है क्योंकि ये पुलिस पहले भी लगी थी किंतु उसका असर दिखा नहीं था।


ओजस्वी मार्वल के टेक्नीशियन ने लगाई फाँसी
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ओजस्वी मार्वल के टेक्नीशियन ने लगाई फाँसी घटना कटनी स्लीमनाबाद करीब 1 से 2 बजे चित्रसेन जेतवार पिता देवनलाल जेतवार उम्र करीब 30 साल वारा सिवनी जिला बालाघाट का था स्लीमनाबाद में भैया जी दुबे के घर किराये से रेहता था बताया ये जा रहा है कि नवीन इंफ़्रा प्रा , ली, इंदौर में काम करता था वर्तमान में ओजस्वी मार्वल में 4 साल से वॉल्वो मशीन का मेंटिनेंस का काम करता था।पुलिस मौके पर मौजूद घटना के कारण का अभी खुलासा नहीं हुआ ।यह भी केह पाना मुश्किल होगा कि ये आत्म हत्या या फिर हत्या है ।


मार्वल खदान में लो .नि .वि . विभाग की सड़क धंसी देखे पूरी खबर रात 8 बजे
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कटनी स्लीमनाबाद थाना अंतर्गत हत्या का पर्दा फास
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कटनी स्लीमनाबाद थाना अंतर्गत हत्या का पर्दा फास घटना 5/082017 को अमर सिंह पिता श्याम सिंह मढना निवासी की हत्या कर दी गई थी । काफी मस्कत के बाद पुलिस ने पाँच आरोपी सुकचेन यादव पिता बारेलाल यादव,विनोद यादव पिता बारेलाल ,बेटू बर्मन, लल्लू बर्मन, मग्घ पिता निम्मी । धारा 449 364 302 sc st 34 की धारा के तहत पाँच लोगो को गिरप्तार किया है थाना प्रभारी इंद्रेश त्रपाठी ने थाने के स्टाप की भूमिका सराहनीय रही


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यूपी में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर आज लखनऊ पहुंचे जहां सीएम योगी आदित्यनाथ ने अक्षय कुमार को यूपी में स्वच्छता का ब्रांड एंबेसडर बना दिया। यह घोषणा यूपी के सीएम योगी आदिात्यनाथ ने लखनऊ में स्वच्छता अभियान के तहत आयोजित किए गए एक कार्यक्रम के दौरान की। इतना ही नहीं अब यूपी में अक्षय की फिल्म ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ को भी टेक्स फ्री कर दिया गया है। लखनऊ में रायबरेली रोड पर आज मिलेनियम स्कूल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अक्षय कुमार ने स्वच्छता अभियान शुरू किया। इसके क्रम में मुख्यमंत्री के साथ ही अक्षय कुमार तथा अभिनेत्री भूमि पेडेंनकर ने स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने साथ स्वच्छता की शपथ ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद झाड़ू लगाकर प्रदेश वासियों को स्वच्छता के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम को दौरान बड़ी संख्या में स्कूल के बच्चों ने भी इस अभियान में शामिल होकर अपनी भागीदारी दिखाई। बता दें कि अक्षय कुमार अपनी आगामी फिल्म ‘टॉयलेट- एक प्रेम कथा’ के प्रमोशन के तहत राजधानी पहुंचे थे। यहां उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से सफाई और शौचालय से जुड़े योजनाओं के बारे में बात की और साथ ही वो लखनऊ ‘क्लेंलिनेस ड्राइव’ प्रोग्राम में भी भाग लेंगे। योगी आदित्यनाथ के साथ अक्षय कुमार ने खुद तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है जहां वो मुख्यमंत्री से बात करते नजर आ रहे हैं। अक्षय कुमार लखनऊ के बाद आगरा जाएंगे जहां लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक करेंगे। गौरतलब है कि अक्षय इससे पहले पीएम मोदी से भी इस फिल्म के सिलसिले में मिल चुके हैं। अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ 11 अगस्त को रिलीज होगी


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कांग्रेस उपाध्यक्ष जाते हैं लोगों का दुख बांटने लेकिन उल्टा लोग ही उन्हें दुखी कर देते हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बनासकांठा गए राहुल गांधी को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों का विरोध इतना कि उनपर पत्थर से हमला भी किया गया जिससे उनकी गाड़ी का कांच टूट गया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में उनको कोई नुकसान पहुंचा किंतु इस पूरे से सियासत गर्मा गई है। जहां कांग्रेस के लोगों का कहना है कि पत्थर फेंकने वाले मोदीभक्त थे वहीं भाजपा का कहना है कि ये स्थानीय लोगों का गुस्सा था जो राहुल गांधी पर फूटा। शुक्रवार को राहुल गांधी गुजरात के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बनासकांठा जिले में पहुंचे। वहां उन्होंने पीड़ित लोगों का दुख बांटने पहुंचे थे। किंतु उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उनके साथ इस तरह का हादसा हो जाएगा। लोगों को संबोधित करने के दौरान कुछ लोगों ने उनके गाड़ी पर पथराव करना शुरू कर दिया। पत्थर कार के पीछे वाले शीशे में लगी जिससे शीशा चकनाचूर हो गया। इस दौरान राहुल गांधी के साथ प्रदेश के प्रभारी अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी और अर्जुन मोढवाडिया भी थे। इस दौरान राहुल गांधी को काले झंडे भी दिखाए गए। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि ‘आने दो, आने दो, ये काले झंडे यहां लगाने दो, घबराए हुए लोग हैं ये, फर्क नहीं पड़ता हमें।’ कांग्रेस नेता मनु सिंघवीं ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी पर भाजपा के गुडों ने सीमेंट की ईटों से हमले किया। इस हमले की कड़ी निंदा होनी चाहिए। उधऱ पत्थर फेंकने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि इस समय गुजरात, असम, समेत आधा भारत भीषण बाढ़ से ग्रसित है। कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने भी बाढ़ ग्रस्त इलाकों का जायजा लिया था।


हरिजन आदिवासियों की जमीनों पर ओजस्वी मार्बल का कब्जा
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हरिजन आदिवासियों की जमीनों पर ओजस्वी मार्बल का कब्जा कटनी। देश भर मे हरिजन आदिवासी समुदाय के बेहतरी के प्रयास के दावे हो रहे हैं। खास तौर गोंडवाना राज्य के मालिकों यानि आदिवासीयों के उत्थान के लिए मध्य प्रदेश शासन इसमे सबसे आगे होने का दावा करती नजर आती है। आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश हीं वह पहला राज्य है जहां बहुतायत मे आदिवासी हैं और उनकी बेहतरी के लिए सरकार ने तमाम योजनायें चला रखी हैं जिससे आदिवासियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और हीं है। हम जिस मामले की बात कर रहे हैं उसे जब आप सुनेंगे तो सरकार के दावे और उसके मातहत मुलाजिमों की कार्यशैली दोनों पर हीं सवालिया निशान खड़ा हो जायेगा। आज हम एक ऐसे मामले का खुलासा करने जा रहे हैं जिसमे आदिवासी और दलित दोनों हीं सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग का दंश भोगने को मजबूर हैं। इस मामले की जब हमने तहकीकात की तो अदम गोंडवी साहब का एक शेर अनयास हीं जहन मे घूम गया – तुम्हारी फ़ाईलों मे गांव का मौसम गुलाबी है / मगर ये दावे झूठे हैं ये बातें किताबी हैं / हम भी एक गांव की हीं बात कर रहे हैं जिसको लेकर सरकार के मुलाजिमों के सारे दावे झूठे नजर आने लगे। ये गांव है अमोच जो मुख्यालय से करीब 35 किलो मीटर की दूरी पर है हालांकि इस क्षेत्र मे चल रहे गोरखधंधे सरकार की पहुंच से करोड़ों प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं शायद यही वजह है कि इस ईलाके के लोगों के लाख शिकायत के बाद भी सरकारी तंत्र बीते एक साल मे मौके तक नही पहुंच पाया। चलिये अब हम आपको बता हीं देते हैं कि किस तरह से प्रशासन की सह पर ईलाके मे पूंजीपति अपने अवैध काम को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं। दरअसल बहोरीबंद विकासखण्ड के अमोच गांव मे ओजस्वी मार्बल ने संगमरमर की खदान का कारोबार शुरू किया लेकिन उसके पास वेस्टेज मेटेरियल यानि खराब पत्थरों को फ़ेंकने या रखने का कोई पुख्ता इंतजाम नही था बस यहीं से शुरू हो गई अवैध कारोबार की कहानी। ओजस्वी मार्बल ने बिना किसी डर भय के वो सब कुछ कर डाला जिसे करने के लिए एक आम आदमी हिम्मत नही जुटा पाता। खदान से सटे पट्टे की जमीनों का जबरन सौदा किया गया और उन पर पूरा वेस्टेज मेटेरियल उड़ेल दिया गया। खास बात ये कि ये खराब मार्बल जिन जगहों पर डम्प किये गये वो बेहद उपजाउ जमीन थी जिस जमीन के जरिये वहां के आसिवासी और दलित अपने परिवार का भरण पोष्ण करते थे। इतना हीं नही बेपरवाह मार्बल कंपनी ने उस ईलाके मे बने कपिलधारा योजना के कुँये के साथ शासन के उस तालाब को भी नेस्तनाबूत कर दिया जिसके बूते वहां के लोगों का भरण पोष्ण चलता था। आप देखिए इन तस्वीरों को जिसमे कुँये का जगत तो नजर आता है लेकिन बाकी का सब कुछ खत्म हो गया है – तस्वीरों मे दिख रही इस सड़क के नीचे कभी तालाब हुआ करता था जिसके बूते यहां के लोग सिंचाई करते थे और भीषण गर्मी मे मवेशी पानी पीते थे लेकिन पैसे कमाने और कारोबार को जिन्दा रखने के लिए इस तालाब ही भी हत्या कर दी गई।       ऐसा नही कि इस बात की जानकारी उन तमाम सरकारी अधिकारियों को नही है जिनके बूते प्रशासन भ्रष्टाचार खत्म करने का दावा करता है। तमाम जानकारी के बावजूद भी अधिकारी मामले की जाँच का भरोसा जता कर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। सबसे अहम बात तो ये कि कई जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को लेकर मीडिया से रू ब रू भी नही होना चाहते। उन्हें इस बात की बेहतर जानकारी है कि मौके पर क्या कुछ हो रहा है और अगर वे मीडिया के सामने आये तो उनकी सारी कलई खुल जायेगी।       दरअसल पच्चीस जनवरी सन दो हजार तीन मे ईलाके के गरीब आदिवासियों और दलितों की जिन्दगी बेहतर बनाने के लिए सरकार ने आठ लोगों को तकरीबन सत्रह एकड़ जमीन का पट्टा दिया। जिसे खसरा नंबर 103/1 से लेकर 103/ 8 तक बटांकन किया गया था। जमीन के पट्टे के बाद लोगों ने सोचा कि चलो अब जिन्दगी आसान हो जायेगी, इसी लालच मे लोगों ने खेतों मे कुंयें भी बनवा लिए और शासन ने किसानों की बेहतरी के लिए तालाब का निर्माण करवा दिया। विकास की बाट जोह रहे लोगों की जिन्दगी मे खुशहाली आ गई और कुछ साल तक खेती किसानी करने वाले इन तमाम लोगों ने भविष्य के सपने भी बुनना शुरू कर दिया, लेकिन मुसीबत ने उनका पीछा नही छोड़ा और कुछ साल के बाद हीं ईलाके मे ओजस्वी मार्बल ने खदान का कारोबार शुरू किया और इन तमाम किसानों की जमीन को जबरन औने पौने भाव मे हथिया लिया। मार्बल कंपनी के इस व्यवहार से ठगे लोगों ने ग्राम पंचायत के पास गुहार लगाई और ग्राम पंचायत ने सर्व सम्मत्ति एक होकर 28 जुलाई 2016 को जिले के मुखिया से मदद मांगी। उन्हें भरोसा था कि जिलाधीश की चौखट से उन्हें जल्द हीं न्याय मिल जायेगा, लेकिन एक साल के बाद भी उन्हें प्रशासन से कोई मदद नही मिली। हद तो तब हो गई जब कलेक्टर साहब ने मामले की जानकारी को हीं सिरे से खारिज कर दिया।       अब हम पहुंचे जिला माईनिंग अधिकारी के पास, हमें उम्मीद थी कि इनके पास तो मामले की पुख्ता जानकारी होगी क्योंकि ईलाके मे चल रही तमाम खदानों के रोज का लेखा जोखा इनके पास मौजूद होता है, लेकिन मैडम को जैसे हीं मामले की जानकारी लगी उन्हेंने वक्त नही होने का बहाना बना दिया और तो और मोबाईल भी बंद कर दिया ताकि उनसे इस मामले मे किसी तरह की बात ना की जा सके।       ईलाके के लोगों की मानें तो उन्होंने मामले की शिकायत महज कलेक्टर को भर नही दी है उन्होंने इसकी शिकायत एस डी एम, तहसीलदार से लेकर जनपद पंचायत के आला अधिकारियों तक की है लेकिन ये तमाम अधिकारी आज भी जाँच की बात कर रहे हैं। इनके बयान के बाद यह देखना भी बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले वक्त मे जाँच मे और कितना वक्त लगेगा –       आपको बता दें कि ओजस्वी मार्बल का एक ऐसा हीं मामला स्लीमनाबाद मे आया था जिसमे तात्कालीन तहसीलदार प्रभाकर गर्ग नप गये थे। यह मामला भी इसी तरह का था जिसमे सुखचैन चौधरी की पट्टे की बेशकीमती जमीन को अपने करीबी के पक्ष मे रजिस्ट्री करवा दी थी जिसकी शिकायत के बाद रजिस्ट्री को शून्य करार देते हुए तहसीलदार को सस्पेण्ड कर दिया गया था। मामला आज भी न्यायालय मे लंबित है।         जाहिर तौर पर इस मामले को लेकर जिस तरह से प्रशासनिक अधिकारियों ने रूख अपनाया है उससे उनके अलावा सरकार के उन तमाम दावों और योजनाओं पर सवालिया निशान लगता है जिसमे वे दलितों और आदिवासियों के उत्थान का दम भरते हैं। हाल हीं मे राष्ट्रपति चुनाव से लेकर कांग्रेस के नेता के विवादित बयान पर हाय तौबा मचाने वाली भाजपा के कथनी और करनी क्या है यह कहानी उसका जीवन्त उदाहरण है। न्यूज़ इंडिया वेव टीव्ही की खास रिपोर्ट चीफ़ एडिटर- संतोष सिंह राजपाल एडिटर- जगदीश विश्वकर्मा न्यूज़ एडिटर- ओम सरावगी


गुरु केसे कहते है
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धर्म उपदेशक और गुरु दोनो अलग है। (1) पुरोहित पंडित जी (2 )कथावाचक अथवा शास्त्री गण (3 )तपस्वी त्यागी सन्यासी (4 )वेदांती गण (5 )योगी अथवा आध्यात्मिकता गण,गुरु (6 )अंशावतारी गुरु (7 )पूर्ण अवतारी तत्वज्ञान दाता सद्गुरु (1 )धार्मिक मान्यताओं के अंतर्गत प्रायः खासकर देहातोंप्रारंभिक घरेलू पूजा-पाठ कथा सत्यनारायण व्रत कथा आदि सांसारिक उपनयन संस्कार विवाह संस्कार आदि उत्सव बगैरा को पुरोहित पंडित जन संपन्न कराते है प्रारंभिक स्तर पर इनको महत्व भी अधिक दिया जाता है क्योंकि प्रायः सभी घरेलू धार्मिक अनुष्ठान इन्हीं के माध्यम से हुआ करता है इसके एवज में दान दक्षिणा आदि प्राप्त करके अपना परिवार जीवन यापन करते कराते हैं जोकि वशिष्ट जी महाराज के अनुसार समाज में निंदनीय और घृणित कार्य है ऐसा इसलिए उन्होंने कहा क्योंकि यजमानों का सारा प्राश्चित इन्हीं पुरोहित लोगों पर पड़ता है प्रायः ऐसा देखा जाता है कि पुरोहित की आमदनी चाहे जितनी भी हो प्रायः कंगाली का ही जीवन व्यतीत करते हैं धर्म की वास्तविक स्थिति से इनका कोई मतलब नहीं होता । इन्हें गुरु की संज्ञा नहीं दी जा सकती (2 )कथा वाचक एवं शास्त्री गण कर्मकांडी मान्यता के अंतर्गत किसी शास्त्र विशेष पर जैसे भागवत महापुराण रामायण रामचरितमानस गीता आदि आदि ग्रंथों पर थोड़ा-बहुत अध्ययन करके खासकर श्री राम और कृष्ण जी की लीला हमारे नेनो को जो हंसाने वाला हो रुलाने वाला जन मानस को रिझाने वाला होता तथा ऐसी लीला प्रकरण को जिसमें जनमानस रुचि लेते हो और अधिकार अधिक दान दक्षिणा देते हो उसे खूब इधर-उधर के प्रकारों को लेकर जोड़ घटा कर वर्णन करते हैं इनका एक ही लक्ष्य रहता है धन अर्जन करने का ऐसी कथा वाचक भी गुरु की श्रेणी में नहीं आते (3) तपस्वी त्यागी सन्यासी (क ), तपस्वी तप शब्द का शाब्दिक अर्थ है तपना यानी कष्ट सहन करना सत्य के लिए अथवा परमात्मा परमेश्वर के लिए अथवा धर्म की राह पर रहने चलने पर जो भी कष्ट परेशानियां आती हैं उन्हें प्रसन्नतापूर्वक अथवा सहज भाव में सहन करते हुए प्रसन्न मुद्रा में धर्म पथ पर चलते रहना तप कहलाता है जबकि यही सब स्थिति संसारिक परिवारिक स्थिति परिस्थिति में होती हैं तो उसे आपदा विपदा कहते हैं क्योंकि यह शरीर और परिवार को कष्ट कर अति कष्टकर बना देता है कंगाल बना देती है बता ग्रस्त बना देती है जिससे आदमी टूट जाता है और प्रायः अधिकतर व्यक्ति नाना प्रकार के व्यक्तियों का शिकार हो जाया करते हैं जबकि ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों तपस्वी को आगे बढ़ने हेतु धर्ता प्रदान करती है साहस प्रदान करती है अपने तप के मार्ग में सत्य के मार्ग में भगवत मार्ग में धर्म के मार्ग में बल प्रदान करती है (ख )त्यागी तप त्याग और सन्यास लगभग एक ही श्रेणी के अंतर्गत होने रहने वाले भिन्न भिन्न प्रकार हैं तब सत्य के लिए परमेश्वर के लिए धर्म के लिए दुख कष्ट आपदा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रसन्नतापूर्वक सहज सहनशीलता है तो त्याग सत्य की राह में परमेश्वर की राह में धर्म की राह में नकारात्मक झूठी और मायावी चीजों से रहित होना रहना है (ग ) सन्यासी गण सन्यास धर्म अथवा परमात्मा परमेश्वर भगवान के खोज के अंतर्गत प्रारंभिक क्रिया-कलाप के साथ ही साथ एक बहुत ही कठिन संकल्प और संकल्प का पालन भी है वास्तव में सन्यास का अर्थ परमेश्वर की खोज में परिवारिक सांसारिक संबंधों सहित सुख-दुख से अपनी इंद्रियों को बिल्कुल निरस्त कर देना अर्थात पूर्णता भोग विषयों से अपने इंद्रियों को मोह तोड़ कर पूर्णता परमेश्वर की खोज में लगा देना तपस्वी त्यागी सन्यासी भी गुरु की श्रेणी में नहीं आते (4) वेदांती गण वेदांत का शाब्दिक अर्थ वेद के अंतर्गत स्थित अंतिम उपलब्धि है जो वेद के अंतर्गत स्थित अंतिम उपलब्धि का अर्थ भाव है परमतत्व रूप आत्मतत्व शब्द रूप भगवत तुम परमात्मा परमेश्वर परम ब्रह्म की प्राप्ति जिसमें जड़ चेतन रूप संपूर्ण सृष्टि ब्रम्हांड भी अपने संपूर्ण प्रधानों सहित संपूर्णता साहब समाहित रहता है जिसे जान प्राप्त कर लेने के पश्चात कुछ भी जानना प्राप्त करना शेष नहीं रहता। इन्हें भी गुरु की संज्ञा नहीं दी जा सकती (5 )योगी अथवा अध्यात्मवेत्ता गुरु योग का समान अर्थ होता है जोड़ना योग शारीरिक एक्सरसाइज कसरत को नहीं कहते योग का मतलब है जीव आत्मा ईश्वर ब्रह्म से मिलने की क्रिया को यह कहा जाता है इसी योग को अध्यात्म भी कहते हैं क्योंकि अध्यात्म शब्द में आत्मा दो शब्द होता है और उसमें अधि उपसर्ग होता है जिसका अर्थ होता है आत्मा की ओर अर्थात जीव का आत्मा से मिलन जुलन की क्रिया योग है कहने का मतलब सीधा जो जीव आत्मा ईश्वर ब्रह्म से मिला दे या खुद मिल चुका हो उसे गुरु कह सकते हैं। मगर पूर्ण गुरु नहीं कह सकते (6 ) अंशावतारी गुरु अवतारी परम प्रभु परमेश्वर के प्रकाश दूध अथवा प्रकाश संदेश वाहक के रूप में भूमंडल पर आते हैं वह अंशावतारी गुरु कहलाते हैं (7 )पूर्ण अवतारी तत्वज्ञान दाता सद्गुरु पूर्ण अवतारी शब्द का वास्तविक शाब्दिक अर्थ पूर्ण रूप में रहने वाले खुदा गॉड भगवान का अपने परम धाम अमरलोक पैराडाइज से भूमंडल पर अवतरित हाजिर नाजिर कर किसी शरीर विशेष को अनुग्रहित कर उस शरीर के माध्यम से अपने लक्ष्य कार्यरत धर्म धर्मात्मा धरती की रक्षा कार्य संपादन करने वाले से है तत्वज्ञान संपूर्ण का संपूर्णता बातचीत और साक्षात दर्शन सहित सुनिश्चित और स्पष्ट अध्यक्ष बोध सहित यथार्थ जानकारी है जो संपूर्ण ब्रह्मांड में ही एक व एक मात्र केवल खुदा गॉड भगवान ही दे सकता है खुद को जाना मिला दिखा सकता है वही परमात्मा की सिर्फ केवल सद्गुरु है जो स्वयं अपने आपको दिखा सकता है परमपिता परमेश्वर परमात्मा के अलावा किसी को भी सद्गुरु लिखने का अधिकार परमात्मा ने नहीं दिया अब आप स्वयं ही जांच लें कि जिसे हम लोग गुरु कहते हैं क्या वह गुरु की संज्ञा में आते हैं कि नहीं शिक्षा एवं ज्ञान दोनों अलग अलग शिक्षक और गुरु यह भी दोनों अलग अलग है संतोष सिंह राजपाल


इन साइड़ स्टोरी आँफ भारत - पाक मैच :-
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इन साइड़ स्टोरी आँफ भारत - पाक मैच :- कितने अफसोस और शर्म की बात है कि देशभक्तों की सरकार, देशभक्त क्रिकेट संगठन और देश भक्त मीडिया जो हर पल पाकिस्तान की नापाक के नाम से संबोधित करती है ! वहाँ पल रहे दाउद के खिलाफ सिर्फ ज़ुमला राग़ का अलाप करती हैं ! कल के हारे हुए क्रिकेट मैच की इन साइड़ स्टोरी भी दिन दहलाने वाली है ! एक ओर तो मोदी/ भाजपा सरकार आतंकवाद और कालाधन के नाम पर नोटबंदी लागू करके सवा सौ लोगों की जान लेती है, देश के काम धंधों और रोजगार को बेरोजगारी में बदल देती है ! आतंकवाद पर नियंत्रण कितना ये देश नही विश्व देख रहा है ! दूसरी ओर और जो ये कल का मैच हुआ इसने हमारे देश के सत्ताधारियों की कलई खोल दी है ! देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों ने लिखा है इस मैच में दो हजार करोड़ का सट्टा लगाया गया था ! अब समझने और सोचने वाली दो बातें हैं बातें ये है पहली कि आखिर क्या ये रूपया दाऊद के पास नही गया / अर्थात आतंकवादियों को प्रत्यक्ष मदद नही की गई ? दूसरी - नोट बंदी में अगर सारा रूपया बैंकों में आ चुका है [ सरकार जिसका हिसाब नही दे रही है ] तो क्या सट्टा में लगाये गये दो हजार करोड़ रूपयों का लेनदेन किसी एप्स के माध्यम से सरकार की स्कीम ड़िजीटल इंड़िया के अंतर्गत हुआ है ? अगर ऐसे ही काम मोदी सरकार करती रही तो आँखों में आँख ड़ालकर बात करना भी सिर्फ जुमला है ! देश भक्त आम भारतवासी तो हाकी की जीत में खुश है ! * जगदीश विश्वकर्मा सम्पादक - न्यूज़ इंडिया टी वी


गला रेत कर हुई चौथी हत्या
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ब्रेकिंग न्यूज़ बहोरीबंद थाना अंतर्गत घर के बाहर सो रहे इमरत पटैल पिता बैशाखू, ग्राम सिमरा पटी, बहोरिबंद उम्र 32 साल की गला रेत के हत्या मोके पर पुलिस बल मौजूद क्षेत्र में यह दूसरी घटना है। पेहली घटना स्लीमनाबाद थाने के छपरा गाँव मे तीन लोगों की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी इस कारण से क्षेत्र में दहशत का माहौल फैला हुआ है पेहली घटना *कटनी*। स्लीमनाबाद थाना अंतर्गत ग्राम छपरा में मध्यरात्रि धारदार हथियार से हमला कर तीन लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई। मरने वालों में एक वृद्ध महिला व दो वृद्ध शामिल हैं। जिसमें से वृद्धा व एक वृद्ध को हाइवे के किनारे मकान के बाहर सोते समय हमला कर मौत के घाट उतारा गया जबकि गांव के बाहर हाइवे के ही किनारे मार्बल माइंस के वृद्ध चौकीदार की गर्दन काटकर नृशंस हत्या के बाद आरोपी उसका सिर अपने साथ ले गए। *पहुंचा पुलिस अमला शुरू की जांच* घटना की सूचना आज सुबह मिलते ही पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला आला पुलिस अधिकारियों, खोजी कुत्ते व फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। *आसपास रहते हैं तीनों* इस संबंध में पुलिस व सूत्रों से मिली अलग-अलग जानकारी के मुताबिक स्लीमनाबाद थाना अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 के किनारे स्थित ग्राम छपरा निवासी 70 वर्षीय जगदीश पिता पूरन सिंह व उसके पड़ोस में रहने वाली 69 वर्षीय वृद्ध महिला पूनिया बाई पति मंगीलाल बर्मन भीषण गर्मी के कारण रोज की तरह मकान के बाहर खटिया डालकर सो रहे थे। मध्यरात्रि के लगभग दोनों को अज्ञात आरोपियों ने सिर व गर्दन में धारदार हथियार से हमला कर मौत के घाट उतार दिया। वहीं गांव के बाहर हाइवे के ही किनारे स्थित डालफिन मार्बल कंपनी की चौकीदारी करने वाले गांव के ही 65 वर्षीय वृद्ध जालिम सिंह पिता बुद्धे सिंह की भी इसीप्रकार हत्या करने के बाद आरोपी उसका सिर काट कर ले गए। गांव में तीन लोगों की नृशंस हत्या के बाद से सनसनी का माहौल है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में हत्यारों व हत्या के पीछे के कारणों के संबंध में कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस इसे किसी सिरफिरे युवक की करतूत सहित घटना के सभी बिंदुओं पर जांच करते हुए आरोपियों के संबंध में सुराग लगाने का प्रयास कर रही है।


हैक की जा सकती है EVM
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EVM हैक हो सकती है और इसको हैक करके दिखाया जा चुका है, चुनाव आयोग के इस जवाब का जवाब 2010 में ही आ चुका है। 18 मई 2010 को छपी बीबीसी की रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है रिपोर्ट में मिशिगन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के हवाले से दावा किया गया है कि सिर्फ एक एसएमएस भेजकर भारत की ईवीएम के नतीजे बदले जा सकते हैं। रिपोर्ट में प्रोफेसर जे एलेक्स हाल्डरमैन ने बाकायदा एक वीडियो में ईवीएम को हैक करके दिखाया था। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईवीएम के डिस्प्ले बोर्ड को हैक किया जा सकता है और एक मैसेज के बाद वो मशीन में जमा डाटा न दिखाकर टैंपर किया गया डाटा दिखाने लगती है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने एक बेहद सूक्षण माइक्रोप्रोसेसर भी मशीन में लगाकर दिखाया, इस माइक्रोप्रोसेसर से मशीन के अंदर जमा डाटा को भी बदला जा सकता था। US scientists ‘hack’ India electronic voting machines : BBC report By Julian Siddle Science reporter, BBC News 18 May 2010 From the section South Asia ———————————— Indian officials inspect an electronic voting machine (2009) India’s voting machines are considered to be among the most tamperproof Scientists at a US university say they have developed a technique to hack into Indian electronic voting machines. After connecting a home-made device to a machine, University of Michigan researchers were able to change results by sending text messages from a mobile. Indian election officials say their machines are foolproof, and that it would be very difficult even to get hold of a machine to tamper with it. India uses about 1.4m electronic voting machines in each general election. *’Dishonest totals’ A video posted on the internet by the researchers at the University of Michigan purportedly shows them connecting a home-made electronic device to one of the voting machines used in India. Professor J Alex Halderman, who led the project, said the device allowed them to change the results on the machine by sending it messages from a mobile phone. It is not just the machine, but the overall administrative safeguards which we use that make it absolutely impossible for anybody to open the machine *Alok Shukla, Indian Election Commission “We made an imitation display board that looks almost exactly like the real display in the machines,” he told the BBC. “But underneath some of the components of the board, we hide a microprocessor and a Bluetooth radio.” “Our lookalike display board intercepts the vote totals that the machine is trying to display and replaces them with dishonest totals – basically whatever the bad guy wants to show up at the end of the election.” In addition, they added a small microprocessor which they say can change the votes stored in the machine between the election and the vote-counting session. India’s electronic voting machines are considered to be among the most tamperproof in the world. There is no software to manipulate – records of candidates and votes cast are stored on purpose-built computer chips. Paper and wax seals India’s Deputy Election Commissioner, Alok Shukla, said even getting hold of machines to tamper with would be very difficult. “It is not just the machine, but the overall administrative safeguards which we use that make it absolutely impossible for anybody to open the machine,” he told the BBC. “Before the elections take place, the machine is set in the presence of the candidates and their representatives. These people are allowed to put their seal on the machine, and nobody can open the machine without breaking the seals.” The researchers said the paper and wax seals could be easily faked. However, for their system to have any impact they would need to install their microchips on many voting machines, no easy task when 1,368,430 were used in the last general election in 2009.


पाकिस्तानी तर्ज की बरवर्त
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*कटनी*। स्लीमनाबाद थाना अंतर्गत ग्राम छपरा में मध्यरात्रि धारदार हथियार से हमला कर तीन लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई। मरने वालों में एक वृद्ध महिला व दो वृद्ध शामिल हैं। जिसमें से वृद्धा व एक वृद्ध को हाइवे के किनारे मकान के बाहर सोते समय हमला कर मौत के घाट उतारा गया जबकि गांव के बाहर हाइवे के ही किनारे मार्बल माइंस के वृद्ध चौकीदार की गर्दन काटकर नृशंस हत्या के बाद आरोपी उसका सिर अपने साथ ले गए। *पहुंचा पुलिस अमला शुरू की जांच* घटना की सूचना आज सुबह मिलते ही पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला आला पुलिस अधिकारियों, खोजी कुत्ते व फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। *आसपास रहते हैं तीनों* इस संबंध में पुलिस व सूत्रों से मिली अलग-अलग जानकारी के मुताबिक स्लीमनाबाद थाना अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 के किनारे स्थित ग्राम छपरा निवासी 70 वर्षीय जगदीश पिता पूरन सिंह व उसके पड़ोस में रहने वाली 69 वर्षीय वृद्ध महिला पूनिया बाई पति मंगीलाल बर्मन भीषण गर्मी के कारण रोज की तरह मकान के बाहर खटिया डालकर सो रहे थे। मध्यरात्रि के लगभग दोनों को अज्ञात आरोपियों ने सिर व गर्दन में धारदार हथियार से हमला कर मौत के घाट उतार दिया। वहीं गांव के बाहर हाइवे के ही किनारे स्थित डालफिन मार्बल कंपनी की चौकीदारी करने वाले गांव के ही 65 वर्षीय वृद्ध जालिम सिंह पिता बुद्धे सिंह की भी इसीप्रकार हत्या करने के बाद आरोपी उसका सिर काट कर ले गए। गांव में तीन लोगों की नृशंस हत्या के बाद से सनसनी का माहौल है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में हत्यारों व हत्या के पीछे के कारणों के संबंध में कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस इसे किसी सिरफिरे युवक की करतूत सहित घटना के सभी बिंदुओं पर जांच करते हुए आरोपियों के संबंध में सुराग लगाने का प्रयास कर रही है। *आरोपी के सुराग लगाए जा रहे हैं- शशिकांत शुक्ला एसपी* घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला का कहना है कि वारदात में तीन वृद्धों को मौत के घाट उतारा गया है। जिसमें एक महिला व दो पुरूष शामिल हैं। घटनास्थल किसी सिरफिरे की हरकत बता रहे हैं। पुलिस अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध हत्या का मामला दर्ज कर उनका सुराग लगाने हरसंभव प्रयास कर रही है।


कटनी कलेक्टर पर उठता सवाल ?
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इन दिनों कटनी कलेक्टर विशेष गढ़पाले चर्चा में छाए रहते है ।उन्हें एक ईमानदार छबि वाले कलेक्टर की नजर से देखा जाता है,साथ ही कर्मचारियों को निलंबित करने में उन्हें महारथ हासिल है उन्हें गलत काम बिलकुल ही पसंद नहीं है ।ऐसा कहा जाता है । पर कुछ बातें तो समझ से परे है । कलेक्टर साहब के नाक के नीचे कटनी से जबलपुर के बीच N H 7 में फोर लाइन रोड का निर्माण चल रहा है जिस में खुले आम मार्बल (डोलोमाइट )के पत्थर की टुकड़ी का इस्तेमाल हो रहा है । जानकार बताते है कि इस पत्थर को रोड निर्माण में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता इसके लिए सिर्फ काली गिट्टी (ब्लेक बेसाल्ट ) का ही उपयोग किया जाना चाहिए अन्यथा सड़क अपनी उम्र से पहले ही समाप्त हो जायेगी। इतने भरी भरकम बजट के बाद सडक निर्माण कर रही कंपनी दुवारा डोलोमाइट की टुकड़ी का इस्तेमाल कर जहाँ एक ओर करोडो रूपये का सरकार को चुना लगाया जा रहा है वही दूसरी ओर प्रधान मंत्री मोदी के भ्रष्टाचार मुक्त भारत की पूर्णत: अनदेखी की जा रही है । सवाल ये उठता है कि क्या कटनी कलेक्टर को इसके बारे में जानकारी नहीं है ? पर इतनी तेज नजर वाले कलेक्टर से भला ये बात कैसे छुप सकती है । अगर कोई इसकी तह तक जाने की कोशिस भी करता है तो उसे सुचना के अधिकार के तहत जानकारी लेनी पड़ेगी ।जब इस की जानकारी खनिज विभाग से लेने की कोशिस क़ी गई तो ।खनिज अधकारी दीपमाला तिवारी का जबाब ये था कि कुछ फाइल कलेक्टर साहब के पास है ।साथ ही सुचना के अधिकार के तहत दो माह बीतने के बाद भी कोई भी जानकारी एल एन टी कंपनी के बारे में नहीं दी गई । इससे तो ये लगता है कि कटनी कलेक्टर आये दिन किसी न किसी को निलंबित करके सभी का ध्यान एक ही जगह केंद्रित करना चाहते है। तब तक तो डोलोमाइट से रोड का निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा। देखने वाली बात ये है कि क्या कटनी कलेक्टर मामले में कोई ठोस कदम उठाते है या फिर वही ढर्रा चलता रहेगा । संतोष सिंह राजपाल


कांग्रेस बिधायक ने किया ये काम
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ग्रामीणों की सामस्याओ को लेकर बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक कुॅवर सौरभ सिंह जी के नेतृत्व मे आज दिनांक 29/03/17 दिन बुधवार को कांग्रेसजनों ने 11 सूत्रीय मांगो लेकर प्रदर्शन किया।बहोरीबंद मेन बाजार से एक रैली निकाली गई जो कि ब्लाक ग्राउंड के सामने एक सभा मे परिवर्तित हो गई जिसे कांग्रेस नेताओं ने सम्बोधित किया।सभा को सम्बोधित करते बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुॅवर सौरभ सिंह ने कहा कि जनता की सामस्याओ को देखते हुए हर मुद्दे पर मेरे द्वारा पत्राचार किया तहसील स्तर पर चाहे विधुत विभाग हो या किसान की सोसायटी मे समर्थन मूल्य पर धान गेहूँ खरीदी की बात या फिर आप गरीब मजदूर किसानों के खेत पानी पहुँचाने की बात रही हो या ग्रामीण महिला समहो को प्राईवेट बैंकों द्वारा वितरित लोन की बात रही हो आदि विषयों पर मंत्री मुख्यमंत्री और विधानसभा स्तर मुद्दा उठाया लेकिन भाजपा सरकार आंख मूंदकर दलालों और भ्रष्ट लोगों के कहने पर जनता की आवाज दवाई जा रही है।बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुॅवर सौरभ सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है जब भाजपा के इन दलालों की दुकान चलाने के विरोध सड़कों पर उतरना पडा है।जनता के हक हर लड़ाई लड़ी जावेगी चाहे इसके लिए धरना प्रदर्शन करना पड़े या फिर सम्बधित दपत्तरो की तालाबंदी करना पड़े हर जनता के हक हर लड़ाई लड़ी जावेगी।ब्लाक ग्राउंड से कांग्रेसजनों की रैली विधुत मण्डल कार्यालय पहुँची जहाँ कांग्रेसियों ने धेराव कर विधुत मण्डल कार्यालय मे तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया।बहोरीबंद विधायक कुॅवर सौरभ सिंह के नेतृत्व मे हजारों की संख्या मे कांग्रेसजनों ने 11 सूत्रीय मांगो का ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी के नाम सौंप कहा कि यह सांकेतिक प्रदर्शन था अगर एक सप्ताह मे सामस्याओ का निराकरण नहीं किया जाता तो उग्र आंदोलन किया जावेगा।इस दौरान रैली में ग्रामीण क्षेत्रों से पहुँची महिलाओं ने विधुत मण्डल द्वारा दिए गए मनमाने बिजली के बिलों को लेकर जमकर हंगामा किया और बिजली के बिलों मे सुधार की मांग रखी।


कटनी स्लीमनाबाद चल रहा था एकं जान कर चोक जायगे आप
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ब्रेकिंग कटनी: स्लीमनाबाद में मेसर्स शिखरचंद एंड संस द्वारा कागजों में संचालित किये जा रहे केरोसिन डिपो पर खाद्य विभाग की कार्रवाई।अधिकारियों को मौके पर न तो ऑफिस का पता चला न किसी प्रकार के केरोसिन संबंधी कारोबार का।केरोसिन डीलर पिछले दो साल से सिर्फ कागजों में संचालित कर रहा था कारोबार।अधिकारियों के मुताबिक उपरोक्त डीलर 2015 तक स्लीमनाबाद निवासी सुरेन्द्र दुबे के किराए के मकान पर अपना कारोबार संचालित करता रहा लेकिन उसके बाद डीलर का कारोबार कहाँ से हो रहा है इसकी जानकारी किसी के पास नही है।जबकि उपरोक्त डीलर द्वारा हर महीने तेल का उठाव किया जाता रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कई पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी की भी शिकायत मिली हैं जो अपने तय जगहों पर संचालित नही हो रही हैं ऐसे फर्जी कारोबारियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जायेगी।


सांसद डा.चिंतामणि मालवीय ने सरकार के सामने खड़ा किया सवाल
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सांसद डा.चिंतामणि मालवीय ने बिना बोले सबाल खड़ा कर दिया एक दिन में 7 बीघा का तालाब निर्माण करवा कर सरकार के सामने सवाल खड़ा किया कि जब 7 बीघा का तालाब एक दिन में बन सकता है ,तो फिर सरकार जिन तालाबो का निर्माण करा रही है उनमें से हजारों की तादात में अधूरे पड़े है और तो और निर्माण सालो में पूरा नहीं हो पा रहा इस का क्या कारण है आंतरिक मेनिज्मेंट के चक्कर में तालाब अधूरे रेह जाते है ये एक सोचनीय बात है । अगर सरकार से पूछा जाये की तालाब निर्माण में इतनी देरी कियू होती है।तो शायद जबाब यही आयेगा की मिशनरी का उपयोग नहीं होता इस लिए देर होती है ,जबकि ऐसा नहीं वाटर मिशन से आज देश भर में हजारों तालाब खुद रहे है जादा तर अधूरे ,और लम्बे समय अवधि में खुद प् रहे है जबकि इस मिशन में मिशनरी का उपयोग किया जाता है।इधर मुख्यमंत्री कहते है पानी बचाओ पानी का संग्रह करो पर तालाब निर्माण में देरी का कारण नहीं पता किया,या फिर पता है,दोनों बातें हो सकती है फिर भी मालवीय ने सरकार के सामने सवाल तो खड़ा कर ही दिया ।ऐसे नेक काम को सरकार को चाहिए की जल्द पूरा करवाये तालाब सबसे जादा बेजुवान पशुओं के लिए है आम जनता हे लिए तो है ही आप ही बताये बे जुवान पशु किस सदन में जाकर अपनी आवाज उठाये संसद मालवीय ने वे जुवान की बात सुनी और एक इतिहास रचा साथ ही सरकार के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया । अब सरकार को चाहिए की सभी तालाब निर्माण बरसात के पहले कराये जिससे पानी का संग्रहण हो सके संतोष सिंह राजपाल


बाबा और राजनीति की असली बात पढे पूरी खबर
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क्या बाबाओ को चलाना चाहिए राजकाज एक तरफ देखा जाय तो बाबा ही इस देश को सही तरीके से चला रहे है, लोग राज नेताओं से तिरस्त हो गए है शिर्फ अपनी झोली भरने की होड़ में दौड़ रहे है कोई भी ईमानदार नहीं है ,और जो अपने को ईमानदार बताने की कोशिस करता है दर्शल वो सब से बड़ा बेइमान है जनता ईमानदार वियक्ति को तलाश रही है और तलासते तलासते बाबा तक पुहुच गई,जबकि अगर अध्यात्म से जाने तो बाबा तो हमेशा मोह माया से दूर भागते है कियू की जहा माया है वहाँ मोछ ,मुक्ति मिल ही नहीं सकती बाबा बनने का उद्देश्य ही एक होता है कि मोछ की प्राप्ति हो जाय , सवाल ये खड़ा होता है जो लोग राजनीति में है वो बाबा नहीं है और उन्हें बाबा या अध्यात्म से जुड़े नाम नहीं लिखने चाहिए ? लगता तो ये भी है कि अब आने वाले समय में सारे बाबा राजनीति में आ जायेगी और तो और बाबा बनेगे ही राजनीति में आने के लिए ।पहले लोग बाबा मोछ प्राप्ति के लिए बनते थे ,अब बाबा राजनीति प्राप्ति के लिए बनेगे किया ये न्याय संगत है आप लोग विचार करे जिसे धर्म का प्रचार करना चाहिए माया मोह से दूर रेहना चाहिए वो अब माया में लिप्त होते जा रहे तो अध्यात्म ,का ज्ञान कोंन देगा और अध्यात्म से तो मुक्ति मिलने वाली नहीं है, मुक्ति तो तत्व ज्ञान से मिलेगी जब धीरे धीरे सारे बाबा राजनीति में आ जायेगी तो फिर ज्ञान कोंन देगा ।वैसे भी देश में बाबा की उपाधि वाले कम है ,सुवधू तो शायद ढूढ़ने से दो चार मिल जाय तो भाग है,संत का मिलना तो बहुत ही मुश्किल है। जब बाबा ही लुप्त होते जायगे ,तो सवधू मिलना मुश्किल है फिर जीव को मुक्ति का रास्ता कोन बतायेगा अब जरा आपही जांचे अध्यात्म की परिभाषा को बाबा : बाबा वो बनता है जिसे बैराग हो जाता है, बैराग का मतलब जब जिसे किसी भी के अंदर राग मतलब बुराई न दिखे समानता की दृष्टि की स्थिति में आ जाता है वो बाबा होता है सवधू : जब बाबा बनने के बाद परमात्मा इतनी लगन लग जाती है कि उसे ये भी पता नहीं लगता कि ये मीठा है या कड़वा जिसे भौतिक संसार का सुवाद का अनुभव तक नहीं होता वो साधु केहलाता है संत : संत का सीधा मतलब ये है, जिसे अदि और अंत की पूरी जानकारी हो ,मतलब कब इस संसार का विनाश होगा अंत होगा और कब पनः संसार की रचना होगी ,संतो को हर वियक्ति के बारे उसकी मौत का एग्जेक्ट टाइम मालूम होता है संसार के विनाश की तारीख एवं टाइम मालूम हो वो संत है। अब आप लोग ही विचार करे की कोन किया है संतोष सिंह राजपाल


अवैध शस्त्रों का जकीरा फेक्‍टरी समेत बरामद,
Badi Khabar
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पन्ना अवैध शस्त्रों का जकीरा फेक्‍टरी समेत बरामद, 10 कटटे 15 कारतूस पिकअप वाहन सहित तीन मोटर सायकल बरामद पन्ना पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता दिनांक 08 एवं 09 मार्च की दरम्यानी रात्री में मुखबिर द्वारा थाना ब्रजपुर क्षेत्र में अवैध अग्नेय शस्त्रों के व्रिक्रय की सूचना पर पुलिस अधीक्षक पन्ना श्री रियाज इकबाल द्वारा सूचना की तक्दीश एवं कार्यवाही हेतु अति0 पुलिस अधीक्षक पन्ना श्री रामदास प्रजापति एवं अनु0 अधि पुलिस अजयगढ श्री आलोक शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक कोतवाली पन्ना अरविन्द सिंह दांगी, थानाप्रभारी ब्रजपुर जसवंत सिंह राजपूत, थाना प्रभारी धरमपुर दीपक सिंह चौहान, थाना प्रभारी सलेहा सुधीर बेगी, एवं अन्य पुलिस कर्मचारियों का विशेष दल गठित किया गया विशेष टीम द्वारा 08 एवं 09 मार्च की रात्री में मुखबिर की सूचना अनुसार पहाडीखेरा क्षेत्र में भवानीपुर तिराहा के पास बडे हार के जगंल में घेराबन्दी की कर सर्चिग की गई, सर्चिग के दौरान बबलू उर्फ बाबूलाल विश्‍वकर्मा पिता भगवानदास विश्‍वकर्मा उम्र ३७ साल निवासी बमीठा जिला छतरपुर जिनके कब्जे से 315 बोर का देशी कटटा एक 315 बोर का कारतूस 6 अदद पच्‍चीस बोर के कारतूस एवं 2 नग 32 बोर के कारतूस मिलें , इस संबंध में पूछताछ पर बबलू द्वारा शेरबहादुर , हाकिम खा, सुनील नामदेव, रामकृष्ण चौरसिया के साथ मोटर सायकल एवं पिकअप वाहन से अवैध हथियार बनाने के लिये आना और सभी के द्वारा अवैध हथियारों का निर्माण करना बताया । जिस पर विशेष दल के सदस्यों द्वारा निम्न आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से सात ३१५ बोर के कटटे , एक बारह बोर का कटटा ,एक बत्‍तीस बोर पिस्टल , एक बत्‍तीस बोर सिक्‍स राउन्ड रिवाल्वर एवं १५ कारतूस, अवैध शस्त्र बनाने की भटटी ( दस छोटी बडी कटटे की नाल , फुकनी , सिलेन्‍डर , डिल मशीन , हथियारों को बनाने का ठीहा, सन्‍सी , हथौडा , १७ इजेक्‍टर , ०९ टिगर , २७ स्‍लाईड , कागज पर बने हुये कटटों के नक्‍से ) पिकअप वाहन न0 एम पी 19 जेए 2904 सफेद रगं , एक सीटी 100 मोटरसायकल एम पी 35 बी 7033 कलर लाल रगं , एक ग्लेमर मोटर सायकल रगं सिल्वर एमपी 35 बी 7543 एवं एक स्पेल्डर मोटर सायकल 6905 बरामद की गई। १ बबलू उर्फ बाबूलाल विश्‍वकर्मा पिता भगवानदास विश्‍वकर्मा उम्र ३७ साल निवासी बमीठा जिला छतरपुर २ शेरबहादुर पिता शिवप्रसाद उम्र ३८ साल निवासी चन्‍दकुंईया थाना नागौद जिला सतना ३ हकीम खा पिता छुन्‍ना खा उम्र ४० साल निवासी भटिया थाना सलेहा जिला पन्‍ना ४ सुनील नामदेव पिता रामप्रसाद नामदेव उम्र २४ साल निवासी ग्राम शिवराजपुर थाना सिंहपुर जिला सतना ५ रामक़ष्‍ण पिता घनश्‍याम श्‍याम दास चौ‍रसिया उम्र २५ साल निवासी ग्राम गजं थाना सलेहा जिला पन्‍ना पुलिस की इस कार्यवाही में निरीक्षक कोतवाली पन्ना अरविन्द सिंह दांगी थानाप्रभारी ब्रजपुर जसवंत सिंह राजपूत थाना प्रभारी धरमपुर दीपक सिंह चौहान थाना प्रभारी सलेहा सुधीर बेगी चौकी प्रभारी सिविल लाईन उपनिरीक्षक सर्वणप्रभा दुवे, चौकी प्रभारी पहाडीखेरा उपनिरीक्षक विनोद यादव, सउनि0 बाबूलाल पाण्‍डेय सउनि जे पी तिवारी प्र0आर0 अशोक शर्मा आर0 हरिराम , आर0 श्‍यामसुन्‍दर ,आर ब्रसकेतु आर0 रामभगत पाण्‍डेय , आर0 राहुल सिंह बघेल आर0 नीरज रैकवार आर0 वीरनारायण सिंह , आर0 जीतेन्‍द्र गुज्‍जर , की सराहनीय भूमिका रही पुलिस अधीक्षक द्वारा टीम के सदस्‍यों को पुरूषक़त करने की घोसणा की गई


पनागर फ़िर हुआ शर्मसार...इलाज न मिलने से मौत
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*पनागर स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की लापरवाही से हुई युवक की मोत* पनागर न्यूज़  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनागर में इन दिनों डॉक्टरों द्वारा की जा रही मनमानी और लापरवाही के चलते आज 30 वर्षीय युवक की तड़प तड़प कर मृत्यु हो गई,  प्राप्त जानकारी के अनुसार परियट महगवां निवासी रज्जु चौधरी को सांस बढ़ने की बीमारी थी सुबह 10 बजे उसे उसके परिजन इलाज हेतु पनागर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया भर्ती उपरांत मरीज को 1 गोली देकर मरीज को जबलपुर रिफर कर दिया गया दिवस अधिकारी आयुर्वेद रत्न डॉ चौहान  रविवार छुट्टी का दिन होने के कारण फार्मेल्टी निभाकर अस्पताल से गायब हो गए। उन्हें भी कई लोगों द्वारा कईबार बार फोन लगाने के बाद भी फोन नहीं उठाया गया। रविवार को अवकाश होने के कारण अस्पताल में ना ही कोई डॉक्टर मौजूद रहता है ना ही कोई नर्स या महिला डॉ रहती है। *बच सकती थी मरीज की जान*- वहीँ युवक की मौत के बाद इलाज कराने आये अन्य मरीजों के परिजनो ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहाँ डॉक्टरों की मनमानी इसी तरह चलती है, युवक घंटे भर तड़पता रहा पर कोई जिम्मेदार डॉक्टरों के ना होने के कारण तड़प तड़प कर युवक राजू चौधरी की मौत हो गई। पनागर के जिम्मेदार अधिकारी व ब्लॉक मेडिकल अधिकारी डॉ लक्ष्मण शाह को कई बार फोन लगाने के बाद भी उनका फोन नहीं उठा। *चला रहे हैं प्राइवेट हॉस्पिटल*  - अस्पताल के अधिकतर डॉक्टरों द्वारा पनागर अस्पताल के करीब ही डॉक्टर हाउस नाम से प्राइवेट अस्पताल खोला गया है जिसमे शासकीय डॉक्टरों द्वारा ड्यूटी के दौरान ही प्राइवेट में इलाज किया जा रहा है इस कारण डॉक्टर अस्पताल में कम ही मिलते हैं नतीजतन भर्ती मरीजों का इलाज करने की बजाय मेडिकल या विक्टोरिया रिफर कर दिया जाता है  या फिर डॉक्टर हाउस में प्राइवेट इलाज किया जा रहा है, एम्बुलेन्स जो शासकीय वाहन है उसका भी प्राइवेट में भरपूर लाभ उठाया जा रहा है इस कारण किसी मरीज को रिफर करने के बाद सबसे बड़ी परेशानी सम्बंधित अस्पताल तक मरीज को ले जाने के लिए अस्पताल में ना ही एम्बुलेन्स रहती है ना है कोई वाहन की व्यवस्था रहती है।


कटनी के किस शासकीय कार्यालय नहीं फेहराया गया राष्टीय ध्वज
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स्लीमनाबाद के पोस्ट ऑफिस मे नहीं फेहराया गया तिरंगा आज पूरा देश उत्सव मना रहा है वही कटनी जिले के स्लीमनाबाद में ये वाकिया सामने आया है गौरतलब ये है कि काटनी कलेक्टर ने सभी सशकीय कार्यालय को निर्देशित किया गया था कि सभी इस राष्टीय पर्व को मानाने की बात कही गई थी पर कलेक्टर की बात को तक में रख कर न ही कार्यालय ताला खुला न ही राष्टीय धुवाज फेहराया गया ऐसे कृत्य को देश विरोधी कहे तो गलत नहीं होगा


कटनी में किस शासकीय कार्यालय में नही फेहराया गया राष्टीय ध्वज
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ध्वजारोहण को लेकर बवाल
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मनगवाँ नगर पंचायत मे ध्वजारोहण को लेकर बवाल_____ अध्यक्ष प्रमोद उर्मलिया समर्थकों के साथ बैठे आमरण अनशन मे मौके मे पहुँचे एसडीएम______ रीवा मनगवाँ नगर पंचायत मे ध्वजारोहण को लेकर मचा बवाल आज सुबह पूर्व अध्यक्ष सीता साकेत के द्वारा गुप्त चुप तरीके से नगर पंचायत पहुँच कर ध्वजारोहण कर दिया इस घटना के बाद राजनीति मे भूचाल आ गया है समर्थकों के साथ धरने मे बैठे प्रभारी अध्यक्ष प्रमोद उर्मलिया ने इसका कड़ा विरोध कर रहे है लगातार काफी संख्या मे अध्यक्ष प्रमोद उर्मलिया के समर्थक मे पहुँच रहे है मौका मे मनगवाँ एसडीएम केपी पाण्डेय अन्य अधिकारी पहुँचे वही पुलिस भी पहुँची है प्रभारी अध्यक्ष प्रमोद उर्मलिया व उनके समर्थक की माँग है की जब अध्यक्ष सीता साकेत को पद से हटा दिया गया है इस आदेश की कांपी भी नगर पंचायत के अधिकारी पूर्व अध्यक्ष को दिया है वही सीएमओ के द्वारा कलेक्टर के आदेश की प्रति सहित तमाम अधिकारी व बैंको को भी दिया जा चुका था आज प्रभारी अध्यक्ष प्रमोद उर्मलिया को ध्वजा रोहण करना था नगर पंचायत मे तैयारी भी पूरी कर ली थी अब अनशनकारियो की मांग है की पूर्व अध्यक्ष सीता साकेत के खिलाफ व इस घटना मे सामिल लोगो के खिलाफ अपराध दर्ज करने गिरफ्तारी माँग व सीएमओ सहित जो कर्मचारी इसपर सामिल है उनपर कार्यवाही की माँग की जा रही है